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अवैध कालोनियों पर एक बार फिर प्रशासन ने कसा शिकंजा।

अवैध कॉलोनियों के नामंत्रण आवेदन किए निरस्त।

नसरुल्लागंज।। नसरुल्लागंज में 52 अवैध कालोनियों पर चल रहा है मुकदमा।

उसके बाद भी नसरुल्लागंज में धड़ल्ले से हो रही हैं अवैध कालोनियों के प्लाटों की रजिस्ट्रीया।
उप पंजीयक को नही है अवैध कालोनियों की जानकारी।

नसरूल्लागंज मे सीहोर रोड महक वाटिका के सामने स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 62/2/1 76,77/2/1 रकबा 1.416 हेक्टर पर अवैध कॉलोनी एवं पारिवारिक बटवारे का मामला न्यायालय नसरुल्लागंज मे विचाराधीन है जिस पर माननीय न्यायालय ने भूमि यथास्थिति का आदेश पारित कर उसकी बिक्री एवं डेवलपमेंट पर रोक लगा दी है।
नसरूल्लागंज मे अवैध कॉलोनी का यह एक ही मामला नहीं है ऐसे 52 अवैध कॉलोनी के मुकदमे चल रहे हैं उसके बाद भी सभी अवैध कालोनियों के प्लाटों की धड़ल्ले से रजिस्ट्रीया हो रही हैं।

या यूं कहें कॉलोनी नाइजर और रजिस्टर की सांठगांठ से हो रही अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री।

अवैध कालोनियों के प्लाटों की रजिस्ट्रीयों का खुलासा कुछ इस तरह से सामने आया की  सीहोर रोड महक वाटिका के सामने स्थित भूमि पर माननीय न्यायालय में तीन मुकदमे चलने के बाद भी कॉलोनाइजर द्वारा प्लॉट खरीदने वालों को गुमराह कर उनकी रजिस्ट्री करवा दी गई और रजिस्ट्रीओ में किसी भी तरह के मुकदमे की कोई जानकारी नहीं दी गई बल्कि रजिस्ट्रियों मे साफ-साफ लिखा है कि इस भूमि पर किसी भी तरह का विवाद या न्यायिक मामला विचाराधीन नहीं है यदि कोई न्यायिक मामला विचाराधीन पाया जाता है तो इसकी संपूर्ण जवाबदारी विक्रेता की होगी यह जमीन पूर्ण रूप से विवाद मुक्त और साफ पाक है।
लेकिन फिर भी इस विवादित भूमि में से 19 रजिस्ट्री करा दी गई हैं किंतु किसी भी रजिस्ट्री में ना तो अवैध कॉलोनी के मुकदमे की जानकारी है और ना ही न्यायिक मुकदमे जानकारी दी गई है।


जेसे ही ये मामला प्रशासनिक आधिकारियों के संज्ञान में आया तो
इन लोगों पर अब प्रशासन ने फिर शिकंजा कस दिया है तहसीलदार लखन सिंह चौधरी ने ऐसे सभी अवैध कॉलोनीयो के नामांतरण के आवेदन निरस्त कर दिए हैं और साथ ही मामले का प्रतिवेदन बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिया है।

 अब आगे देखना यह होगा कि इन अवैध कालोनियों पर प्लॉट बेचने वालों पर क्या कार्यवाही होती है।

आपको बता दें की 2021 के नए अध्यादेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि ऐसे अवैध कॉलोनीयो को वैद्य तभी किया जा सकता है जब तक कॉलोनाइजरो पर  मुकदमा दर्ज ना हो जाए।

मुकदमा दर्ज होने पर कालोनाइजरों पर 7 साल तक की सजा और 10 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

कॉलोनाइजरो से सरकार द्वारा डेवलपमेंट का पैसा भी वसूल किया जाएगा।

अगर कॉलोनाइजर कालोनी के डेवलपमेंट के लिए पैसा नहीं देगा तो उसकी संपत्ति भी कुर्क की सकेगी।

नए अध्यादेश में पुलिस और अधिकारियों को भी उनकी जिम्मेदारी तय की गई है।

अब आगे देखना यह होगा कि यह कार्यवाही आगे कहां तक चलती है या फिर प्रशासन द्वारा छोटी मोटी कार्यवाही कर इस मामले को यूं ही दबा दिया जाएगा ?

BJ-2589 2021-07-29 16:09:04 सीहोर
  • अवैध कालोनियों पर एक बार फिर प्रशासन ने कसा शिकंजा।

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