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भेरूंदा उत्सव मेला बना अपराधियों का अड्डा। जेबकतरे बेखौफ, सीसीटीवी सिर्फ दिखावा—30 हजार की चोरी ने खोली सुरक्षा की पोल

भेरूंदा उत्सव मेला बना अपराधियों का अड्डा।

जेबकतरे बेखौफ, सीसीटीवी सिर्फ दिखावा—30 हजार की चोरी ने खोली सुरक्षा की पोल

सीहोर/भेरूंदा।
भेरूंदा उत्सव मेला अब मनोरंजन का नहीं, बल्कि चोरों, जेबकतरों और अवैध गतिविधियों का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। मेले में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि एक युवक की जेब से करीब 30 हजार रुपये चोरी हो गए, और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हुई।घटना के बाद जब पीड़ित और अन्य लोगों ने मेला परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। कैमरों में साल 2024 की तारीख चल रही थी, समय गलत दर्ज था, यानी कैमरे तो चालू थे पर साल और समय गलत था। इससे साफ होता है कि मेला प्रबंधन मेले कि अवस्थाओ को छुपाना चाहता है इससे भी अधिक गंभीर बात यह रही कि मेला प्रबंधन ने स्वीकार किया कि कैमरे केवल “डराने के उद्देश्य” से लगाए गए हैं, न कि वास्तविक निगरानी के लिए।
यह बयान सीधे तौर पर जनसुरक्षा के साथ धोखा और शासन की गाइडलाइंस की खुली अवहेलना है। नियमों के अनुसार, मेले में होने वाली किसी भी चोरी, दुर्घटना या जनहानि की पूर्ण जिम्मेदारी मेला प्रबंधन की होती है, लेकिन यहां जिम्मेदारी से बचने का खेल खुलकर खेला जा रहा है।
अवैध गतिविधियों का खुला खेल
सिर्फ चोरी ही नहीं, मेले में कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं—
मेले में रिंग के माध्यम से पैसों का दांव लगाया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से जुआ-सट्टा की श्रेणी में आता है।
खाद्य दुकानों पर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार कमर्शियल सिलेंडर अनिवार्य हैं।
अधिकांश खाद्य दुकानों पर फूड लाइसेंस तक मौजूद नहीं, जिससे आमजन के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है।प्रशासन मौन, जनता असुरक्षित हैरानी की बात यह है कि इन तमाम खामियों को लेकर पूर्व में भी खबरों के माध्यम से प्रशासन को अवगत कराया गया, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।हजारों की संख्या में आम नागरिक, महिलाएं और बच्चे मेले में पहुंच रहे हैं, जहां न सुरक्षा की गारंटी है और न ही कानून का डर। चोरों के हौसले बुलंद हैं और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार कौन?क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है?क्या चोरी, हादसे या जनहानि के बाद ही प्रशासन जागेगा?या फिर मेला प्रबंधन और प्रशासन की मिलीभगत में यह सब यूं ही चलता रहेगा अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता है या फिर किसी गंभीर घटना के बाद केवल औपचारिक जांच का नाटक किया जाएगा।

BJ-2589 2025-12-23 23:17:23 सीहोर: नसरुल्लागंज
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