जमीन रजिस्ट्री के बदल गए ये 4 नियम! अब ऐसी होगी रजिस्ट्री। नए रजिस्ट्री रूल्स 2025
भोपाल 26 नवम्बर : भारतीय अचल संपत्ति क्षेत्र में वर्ष 2025 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। सरकार ने जमीन-जायदाद के पंजीकरण में तकनीकी क्रांति की शुरुआत करते हुए पूरी व्यवस्था को आधुनिक बना दिया है। भूमि संसाधन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई यह नवीन योजना देश के नागरिकों को सुविधाजनक, सुरक्षित और तीव्र सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से सदियों पुरानी जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त कर एक सरल मार्ग प्रशस्त किया गया है।
पारंपरिक तरीकों में कागजी दस्तावेजों का ढेर, कार्यालयों में लंबी कतारें और अनगिनत चक्कर लगाना आम समस्याएं थीं। इन सभी बाधाओं को दूर करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। नई व्यवस्था में इंटरनेट के माध्यम से सभी कार्य घर बैठे संपन्न किए जा सकते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
पूर्णतः ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया
सरकार ने एक विशेष इंटरनेट पोर्टल तैयार किया है जहां संपत्ति के क्रेता और विक्रेता अपने समस्त कागजात डिजिटल रूप में जमा कर सकते हैं। यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है और किसी भी स्थान से इसका उपयोग किया जा सकता है। जो काम पहले सप्ताहों में पूरा होता था, वह अब मात्र कुछ दिनों में निपट जाएगा। दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करना होगा और पंजीकरण प्रमाणपत्र भी डिजिटल फॉर्मेट में मिल जाएगा।
यह तकनीक खासतौर पर विदेश में रहने वाले भारतीयों और दूरदराज के इलाकों के निवासियों के लिए वरदान साबित होगी। अब उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी। सभी जानकारी सुरक्षित सर्वर पर संग्रहीत रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत प्राप्त की जा सकेगी। इससे कागजी फाइलों के खोने या नष्ट होने का खतरा भी समाप्त हो जाएगा।
आधार एवं जैविक पहचान की बाध्यता
धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। प्रत्येक खरीदार और विक्रेता को अपना बारह अंकों का आधार नंबर देना होगा और फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन के जरिए पहचान साबित करनी होगी। यह उन्नत प्रौद्योगिकी नकली कागजात बनाने वालों और धोखेबाजों के लिए बड़ी बाधा बनेगी। जैविक पहचान प्रणाली अत्यधिक विश्वसनीय मानी जाती है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की उंगलियों के निशान और आंखों की संरचना अद्वितीय होती है।
इस व्यवस्था का एक अन्य फायदा यह है कि सरकारी एजेंसियों के पास मालिकों का सटीक डेटा उपलब्ध होगा। इससे कर वसूली में सुधार होगा और विभिन्न योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा। ग्रामीण इलाकों में जहां भूमि विवाद आम बात है, वहां यह तकनीक विशेष रूप से प्रभावी सिद्ध होगी। किसी की जमीन जबरन या फर्जी तरीके से हड़पना लगभग असंभव हो जाएगा।
नकदी लेनदेन पर संपूर्ण रोक
नई नीति के अनुसार स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस का भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ही स्वीकार किया जाएगा। नकद राशि लेकर कोई भी कार्यवाही नहीं की जाएगी। यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस, इंटरनेट बैंकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड जैसे विकल्प उपलब्ध होंगे। यह कदम काले धन के प्रचलन को रोकने और आर्थिक पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
डिजिटल भुगतान से प्रत्येक लेनदेन का स्थायी रिकॉर्ड बन जाता है जिसे ट्रैक किया जा सकता है। इससे अघोषित संपत्तियों और कर चोरी पर नियंत्रण पाना आसान होगा। साथ ही, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी क्योंकि सभी राशि का हिसाब-किताब सिस्टम में दर्ज रहेगा। विभिन्न प्रांतों में शुल्क की दरें भिन्न हैं – कुछ राज्यों में 3% तो कुछ में 8% तक, लेकिन पंजीकरण शुल्क अधिकांश जगह 1% के आसपास ही है।
वीडियोग्राफी की अनिवार्य व्यवस्था
पूरी रजिस्ट्री कार्यवाही को वीडियो में रिकॉर्ड करना अब जरूरी कर दिया गया है। इस रिकॉर्डिंग में दोनों पक्षों की स्वीकृति, कागजात का परीक्षण और सौदे की सभी शर्तें शामिल होंगी। यह फुटेज भविष्य में उत्पन्न होने वाले किसी भी कानूनी झगड़े में निर्णायक सबूत का काम करेगी। अगर बाद में कोई यह आरोप लगाए कि उसे धमकाकर या छल से संपत्ति बेचने को मजबूर किया गया, तो वीडियो से वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी।
यह प्रावधान न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या घटाने में सहायक होगा। अदालतों पर बोझ कम होगा क्योंकि स्पष्ट प्रमाणों के आधार पर कई विवाद शुरुआत में ही सुलझ जाएंगे। सरकारी डेटाबेस में सुरक्षित रखे गए ये वीडियो जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
जनता को होने वाले फायदे
आम नागरिकों के लिए ये सुधार बहुत लाभकारी सिद्ध होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब घर से ही सारा काम निपटाया जा सकेगा, जिससे यात्रा खर्च और समय की बर्बादी से बचा जा सकेगा। बिचौलियों और दलालों की जरूरत खत्म हो जाएगी, जो अक्सर मोटी रकम वसूलते हैं। पारदर्शी सिस्टम में भ्रष्टाचार के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। जैविक सत्यापन से धोखाधड़ी की चिंता लगभग समाप्त हो जाएगी।
संपत्ति की सुरक्षा को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और वे निश्चिंत होकर निवेश कर सकेंगे। गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए भी यह प्रणाली सुलभ बनाई गई है। कम रजिस्ट्रेशन फीस के कारण आर्थिक भार भी न्यूनतम रहेगा। समग्र रूप से देखें तो यह सुधार रियल एस्टेट उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और निवेशकों का विश्वास मजबूत करेगा।
राज्यवार शुल्क संरचना
भारत के अलग-अलग राज्यों में स्टांप ड्यूटी की दरें भिन्न निर्धारित की गई हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडु में यह 7% है। राजधानी दिल्ली और बिहार में 6%, छत्तीसगढ़ तथा झारखंड में 4% दर लागू है। महाराष्ट्र में संपत्ति के प्रकार के आधार पर 3% से 6% तक शुल्क वसूला जाता है। मध्य प्रदेश में सबसे ऊंची दर 8% निर्धारित है।
हालांकि स्टांप शुल्क में भिन्नता है, परंतु पंजीकरण फीस लगभग सभी राज्यों में समान रूप से 1% रखी गई है। खरीदारों को अपने प्रांत की फीस संरचना की पूर्व जानकारी होना आवश्यक है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह सारी जानकारी सुलभ होगी और स्वचालित गणना हो जाएगी, जिससे भ्रम या त्रुटि की संभावना नहीं रहेगी।
भूमि पंजीकरण में यह डिजिटल परिवर्तन भारत के विकास की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। तकनीक के उपयोग से पुरानी समस्याओं का समाधान मिला है और नागरिकों को सशक्त बनाया गया है। यह सुधार न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
नोट: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी संपत्ति लेनदेन से पूर्व अपने राज्य के भूमि विभाग या रजिस्ट्रार कार्यालय से आधिकारिक सूचना अवश्य लें। कानूनी परामर्श के लिए योग्य वकील से संपर्क करना उचित रहेगा।