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साइबर क्राइम रोकने की तैयारी, मोबाइल कैमरे और माइक्रोफोन को यूज नहीं कर पाएंगे ऐप

फोन कंपनियों के ऐप से कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना तैयार है। 12 महीने तक फोन का डाटा सुरक्षित करने की तैयारी। 75 करोड़ स्मार्टफोन का प्रयोग अकेले भारत में होता है। 83 तरह के सुरक्षा मानक से जुड़े बिंदु प्रस्ताव में शामिल

 

दिल्ली 12 जनवरी : फोन कंपनियों के ऐप से कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना तैयार है। भारत सरकार साइबर अपराध से निपटने के लिए फोन निर्माताओं पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। नए संचार सुरक्षा मानदंडों से जुड़े प्रस्तावित गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार इसके तहत फोन कंपनियों को सोर्स कोड ‘प्रोग्रामिंग’ से जुड़ी जानकारी देनी होगी जिससे फोन चलता है। प्रोग्राम का भारत स्थित लैब में विश्लेषण होगा और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच भी होगी।

 

संचार सुरक्षा प्रस्ताव में सरकार ने कंपनियों को

सॉफ्टवेयर में भी बदलाव की बात कही है जिसके जरिए फोन में पहले से अनिवार्य रूप से इंस्टॉल ऐप को हटाया जा सके। इसके अलावा ऐप द्वारा फोन के कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए जिससे इन दोनों तकनीकों का गलत इस्तेमाल नहीं हो सके। प्रस्ताव के अनुसार कंपनियों को किसी भी सॉफ्टवेयर अपडेट और सुरक्षा जांच की पूरी जानकारी नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी को देनी होगी।

कानूनी तौर पर लागू करना चाहती है सरकार

साइबर खतरों से निपटने के लिए समय- समय पर फोन में ऑटोमेटिक मालवेयर स्कैनिंग होगी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव का मसौदा 2023 में तैयार कर लिया था, लेकिन अब सरकार इसे कानूनी तौर पर लागू करना चाहती है।

इसको लेकर मंगलवार को सूचना एवं प्रौद्योगिकी

मंत्रालय टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकता है। सरकार ने सुरक्षा मानकों के तहत 83 तरह के मानदंड तैयार किए हैं जिसका कंपनियों ने विरोध किया है।

प्रस्ताव के आठ उद्देश्य

1.फोन में समय-समय पर ऑटोमेटिक मालवेयर स्कैनिंग होगी

 

2.फोन कंपनियां सरकार को अपडेट की पूरी जानकारी देंगी

 

3.अपडेट- सुरक्षा तकनीक को लॉन्च करने से पहले बताना होगा

 

4.केंद्र सरकार कभी इन तकनीकों का परीक्षण कर सकती है

 

5.फोन से जुड़ी गतिविधियों का डाटा एक साल तक सुरक्षित

 

6.डिवाइस को नियमित ऐप परमिशन से जुड़ी चेतावनी देनी होगी

 

7.छेड़छाड़ की स्थिति में सुधार को लेकर पूरी चेतावनी देनी होगी

 

8 सॉफ्टवेयर का पुराना वर्जन किसी हाल में इंस्टॉल नहीं कर सकते

 

लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत साइबर सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने के साथ लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित करना है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा स्मार्ट फोन बाजार है जहां 75 करोड़ स्मार्टफोन का प्रयोग होता है।

 

सूचना एवं प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि इस प्रस्ताव को लेकर कंपनियों का जो भी सुझाव या पक्ष होगा उसपर खुले मन से विचार होगा। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर है, विस्तार से कुछ भी नहीं कह सकते।

कंपनियां: सोर्स कोड का विश्लेषण संभव नहीं

स्मार्ट फोन निर्माताओं ने कहा कि वे सोर्स कोड की सुरक्षा बहुत गंभीरता से करते हैं। ऐप्पल ने वर्ष 2014 से 2016 के बीच चीन द्वारा सोर्स कोड की मांग को कई बार ठुकरा दिया है। अमेरिकी कानूनी एजेंसियों ने भी कई बार सोर्स कोड जानने की कोशिश की लेकिन वे अफसल रहे।

 

भारत के मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एमएआईटी) ने कहा है कि गोपनीयता और निजता के कारण ये संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो एमएआईटी ने पिछले सप्ताह सरकार से इस प्रस्ताव को खत्म करने को भी कहा है।

 

पहले भी हुई सख्ती की कोशिश

केंद्र सरकार ने पिछले साल भी लोगों के डिजिटल सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने के लिए संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से फोन में इंस्टॉल करने का निर्देश दिया था। हालांकि कंपनियों और विपक्ष के विरोध के चलते इस फैसले को सरकार ने वापस लेते हुए कहा था कि ये लोगों की इच्छा पर होगा कि वे ऐप इंस्टॉल करते हैं या नहीं।

 

दिसंबर तक देश भर में संचार साथी ऐप को कुल 1.4 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। सरकार ने कहा था कि इस ऐप से लोगों से जुड़ी गोपनीय जानकारी को कड़ी सुरक्षा मिलेगी।

 

नियमित अपडेट से बैटरी पर असर

एमएआईटी द्वारा सरकार को दिए गए दस्तावेज में उसने कहा है कि नियमित मालवेयर स्कैनिंग से फोन की बैटरी बहुत जल्दी-जल्दी खत्म होगी। सॉफ्टवेयर में किसी तरह का अपडेट करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी जो अव्यावहारिक है, क्योंकि अपडेट तत्काल जारी होते हैं।

 

एमएआईटी ने कहा है कि इसके अलावा सरकार चाहती है कि एक साल का फोन लॉग डाटा सुरक्षित रहे। स्पष्ट है कि फोन में इतना स्पेस नहीं होता है जिससे ऐसा हो सके। ऐसे में इस तरह के नियमों से सिर्फ समस्याओं में ही इजाफा होगा।

 

कंपनियों ने दिया दुनिया का हवाला

भारत सरकार के प्रस्ताव को लेकर कंपनियों ने कहा है कि दुनिया भर के किसी देश ने ऐसा नियम नहीं बनाया है। दिसंबर में एप्पल, सैमसंग, गूगल और शियोमी ने भारत सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक से जुड़े दस्तावेजों से ये जानकारी सामने आई है।

 

काउंटर पॉइंट रिसर्च के अनुसार सैमसंग और शियोमी अपने फोन में गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रायड का प्रयोग करती हैं। भारत में सैमसंग का 19 जबकि शियोमी का 15 फीसदी कब्जा है। वहीं एप्पल की हिस्सेदारी करीब पांच फीसदी है।

 

 

BJ-2589 2026-01-12 13:09:14 none
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